भारत की भूमि राजस्थान आदि काल से ही अपने शूरवीरो और अपने इतिहास से दिनिया भर में मशहूर है और आज हम आपको इस धरती पर अवतार लिए एक ऐसे देव रूपी अवतार और उसके कुछ रोचक इतिहास के बारे में बतायेगे जो आपको इस पवन भारत की भूमि का नागरिक होने पर गर्वांवित महशुस करवाएगा ! तो सबसे पहले इस लेख को सुरु करने से पहले एक बारे प्रेम पूवक बाबा रामदेव का जै कारा लगाएंगे। " बोलों भगतों के पीर बाबा रामदेव की जय "

बाबा रामदेव के कुछ चमत्कार और लीलाये !

बाबा रामदेव के कुछ चमत्कार और लीलाये

दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको बाबा रामदेव के अवतार से लेकर उन के जीवन और उनके कुछ विशेष चमत्कारों के बारे में जानकारी देंगे। ये लेख थोड़ा लंबा हो सकता है आपको इस लेख को टाइम निकल कर पूरा जरूर पढ़ना है। 

बाबा रामदेव के अवतार की कहानी =>>

एक बार की बात है बाड़मेर जिले की शिव तहसील के उंडू काश्मीर गांव के राजा अजमल जी के कोई पुत्र नहीं था वे हमेसा अपने कुल को आगे बैढाने की चिंता में रहते थे। और वे भगवान विष्णु के परम भगत भी थे वे भगवान विष्णु से हमेसा ये प्राथना करते थे की उनको पुत्र प्राप्ति हो लेकिन दिन बीतते गए राजा के कोई संतान प्राप्ति नहीं हुई इससे निराश होकर और भगवान विष्णु से रूठकर वे अपने प्राण त्यागने समंदर में कूद गए। 

वे जैसे ही समंदर में निचे जाने लगे तब उनको भगवान विष्णु के दर्शन हुए और भगवान विष्णु ने उनकी भगती से प्रशन्न होकर कहाँ की महाराज अजमल निरास मत हो में आपकी भगति से बहुत प्रशन्न हु में आपको ये वरदान देता हूँ की भादपद की दूज को जब चंद्रमा की पहली किरण निकलेगी तब दूध का पानी और पानी का दूध बनेगा और आँगन में कुम कुम के पगलिये बनेगे टब में आपके घर में आपका पुत्र बनकर जन्म लूगा। और ये वरदान देकर भगवान विष्णु ने अजमल जी को वापस घर लौटने को बोला। उसके बाद भगवान विष्णु ने अपने वरदान के अनुसार अजमल जी के घर छोटे पुत्र के रूप में जन्म लिया। 

बाबा रामदेव और भैरव राक्षस का युद्ध =>>

दोस्तों कहते है की भगवान के दरवार में देर है लेकिन अन्देर नहीं है। अब में आपको बाबा रामदेव के दुवारा अपने भगतो पर किया गया एक ऐसे उपकार के बारे में बताउगा जो बाबा रामसा पीर की लीलाओ को बखान करता है। ये बात उस समय की है जब भैरव राक्षस के अत्याचारों से राज्य बहुत दुखी था तब बाबा रामदेव अपने भगतो को इस दुख से निकलने के लिए भैरव राक्षक का सहार करने चल पडे। 

तब वे चलते चलते अत्रि मुनि केर आश्रम के पास पहुंचे जहाँ पर भैरव राक्षस आया करता था। मुनि को लगा की ये छोटा बालक कोन है अगर भैरव को पता चला तो वो इसको खाजाएगा इसके डर से मुनि बाबा रामदेव से कहाँ हे बालक तुम कोन हो और यहाँ पर कैसे आये अगर भैरव ने तुम्हे देख लिया तो तुमको खाजायेगा इसलिए तुम मेरे साथ मेरी कुटिया में चलो वहा पर में तुमको छुपा दुगा जिससे भैरव को पता नहीं चलेगा और तुम्हारी जान बच जाएगी। 

ये सुनकर बाबा रामदेव मन में मुस्कुराये और मुनि के साथ मुनि की कुटिया में चले गये मुनि ने रामदेव जी को एक माची पर उनको सुलाया और कम्बल ओढ़ादी। कुछ देर के बाद भैरव राक्षस कुटिया के पास आया और मुनि से पूछने लगा की यह पर कोई बच्चा है क्या मुझे छोटे बच्चे की खुशबू आरही है। 

मुनि ने कहाँ भैरव यहाँ पर कोई नहीं है तुमको वहम हुआ है। लेकिन भैरव माना नहीं और वो कुटिया के पास जाने लगा मुनि भैरव को कुटिया में जाने से रोकने के लिए आगे बड़े और भैरव ने उनको अपने हाथ की फटकार से दूर पटक दिया और कुटिया के अन्दर चला गया। कुटिया के अंदर बालक को सोया देखकर भैरव जोर जोर से हँसाने लगा और बाबा रामदेव को ओढ़ाई हुई कम्बल को खींचने लगा। वो जैसे जैसे कम्बल को खींचता कम्बल और बडी हो जाती वो कुछ देर तो कम्बल खींचता रहा उसके बाद में थक कर वही पर बैठ गया। 

तब बाबा रामदेव कम्बल से बहार निकले और भैरव को जोर से एक पैर की ठोंकर लगाई जिससे वो कुटिया के बहार जाकर गिरा उसके बाद बाबा रामदेव और भैरव राक्षस के बिच घमासान युद्ध होता है और बाबा रामदेव भैरव राक्षस का सहार कर देते है। और अपने भगतो को भैरव के अत्याचारों से बचा लेते है। लेकिन भैरव राक्षस का सहार देखकर अत्रि मुनि बहुत नीरस हो जाते है तब बाबा रामदेव अत्रि मुनि से पूछते है की हे मुनिवर अब तो मेने भैरव का भी सहार कर दिया है अब आप क्यों नीरस है। 

तब मुनि कहते है की हे चमत्कारी बालक आप ने जिस भैरव का सहार किया है वो मेरे लिए पानी लाया करता था इस रेगिस्तान में कहि भी पानी नहीं है अब में बूढ़ा मुनि कहाँ से पानी लाऊगा। बाबा रामदेव ने इतना सुनते ही बंजर पड़े रेगिस्तान में एक बड़ी पानी की तालाब बनादि और मुनि से कहाँ की हे मुनिवर अब आपको पानी लाने की कोई जरुरत नहीं है अब आप इस तालाब से जितना चाहे उतना पानी ले। और ये कहकर बाबा रामदेव अपने घोड़े पर सवार होकर वापस अपने घर की तरफ चले जाते है। 

तो दोस्तों बाबा रामदेव की इस लीला में बाबा ने अपने भगतो को बचने के लिए भैरव का सहार किया और अत्रि मुनि को चमत्कार से पानी का तालाब दिया। 

बाबा रामदेव और मिश्री व्यापारी =>>

दोस्तों ये घटना बाबा रामदेव की एक और लीला को दर्शाता है जिसमे बाबा का एक घमंडी मिश्री व्यापारी को सबक सीखना और उसकी मिश्री को लूँ यानि नमक में बदल देना है। 

ये बात तब की है जब बाबा रामदेव 12 -13 साल के एक बच्चे थे तब वे अपने कुछ मित्रो के साथ अपने राज्य के बाजार घूमने गए वहा पर सभी व्यापारियों ने उनका आदर किया और अपनी अपनी दुकान मे से कुछ सामान खरीदने को कहाँ लेकिन बाबा उस दिन केवल बाजार देखने को आये थे कुछ खरीदने को नहीं आये थे।  

इसलिए उन्होंने सभी को आदरपूर्वक कहाँ की महाशय अभी हम केवल बाजार देख रहे है अगर हमे अच्छा लगा तो हम आपके दूकान से सामान खरीद लगे और बाबा आगे बढ़ गए कुछ दूर चलने के बाद उनको सामने एक मिश्री बैचने वाला व्यापारी मिला जो मिश्री बेच रहा था। बाबा रामदेव ने उससे जाकर पूछा भाई मिश्री क्या भाव बेच रहे हो तो उस व्यापारी ने सोचा ये बालक क्या मुझसे मिश्री लगे बेफालतू ही समय खराब कर रहा है। इसलिए उसने झूट महि बोल दिया कुंवर में मिश्री थोड़ी बेचू मेतो लूण बेचू हूँ।  

ये सुनकर बाबा बोले जैसे तेरी भावना और इतना बोलते ही बोरी में पड़ी मिश्री लूण  यानि नमक में बदल गयी और व्यापारी को पता ही नहीं चला वो वैसे ही मिश्री लेलो बोली लगाने लगा इतने में कोई दूसरा मिश्री लेने वाला ग्राहक उसके पास पहुंचा और बोलै भाई मिश्री कैसे बेचीं है तो मिश्री व्यपारी बोलै भाई गुड़ जैसी मिढ़ी है चखकर देख लो जैसे  ही उस ग्राहक ने मिश्री व्यापारी की मिश्री को चखा तो वो उस मिश्री व्यापारी को पीटने लगा और बोला मिश्री की जगह लूण बेचता है। 

ये सुनकर मिश्री व्यापारी ने खुद अपनी मिश्री चखी वो मिश्री सचमुच में लूण बन गई ये देखकर मिश्री व्यापारी को बहुत पश्च्ताप हुआ और वह बाबा रामदेव के चरणों में जाकर रोने लगा बाबा मुझे माफ़ कर दो मेने आपको पहचानने में भूल है। बाबा ने व्यापारी को रोता देख उसकी लूण बानी मिश्री को फिर से मिश्री बना दिया। 

जरुरी सुचना =>>

दोस्तों इस एक लेख में हम आपको बाबा रामदेव के जीवन और उनके चमत्कारों के बारे में नहीं बता सकते इसलिए हम इस लेख का Part-2  भी लाएंगे जिसमे आपको बाबा रामदेव के जीवन से जुडी कुछ और जानकारिया और उनकी लीलाओं के बारे में विस्तार से बतायेगे। तो दोस्तों एक बार प्रेम से बोलेगे 

🙏🙏🙏 लीले सवार बाबा रामदेव की जय 🙏🙏🙏